Mahamaya Mandir (Chhattisgarh)

About Ratanpur
One of the most religiously-celebrated, architecturally superb and culturally rich temple of south-east India: Shri Mahamaya Devi Mandir, Ratanpur. From many decades since, the temple and the town of Ratanpur have attracted the attention of scores of historians and archeologists.
बिलासपुर – कोरबा मुख्यमार्ग पर 25 कि.मी. पर स्थित आदिशक्ति महामया देवि कि पवित्र पौराणिक नगरी रतनपुर का प्राचीन एवं गौरवशाली इतिहास है। त्रिपुरी के कलचुरियो ने रतनपुर को अपनी राजधानी बना कर दीर्घकाल तक छ्.ग. मे शासन किया। इसे चतुर्युगी नगरी भी कहा जाता है. जिसका तात्पर्य इसका अस्तित्व चारो युगों में विद्यमान  रहा है | राजा रत्नदेव प्रथम ने रतनपुर के नाम से अपनी राजधानी बसाया |
श्री आदिशक्ति  माँ महामाया देवी :- लगभग नौ वर्ष प्राचीन महामाया देवी का दिव्य एवं भव्य मंदिर दर्शनीय है | इसका निर्माण राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा ग्यारहवी शताबदी में कराया गया था | 1045 ई. में राजा रत्नदेव प्रथम मणिपुर नामक गाँव में  शिकार के लिए आये थे, जहा रात्रि विश्राम उन्होंने एक वटवृक्ष पर किया | अर्ध रात्रि में जब राजा की आंखे खुली, तब उन्होंने वटवृक्ष के नीचे अलौकिक प्रकाश देखा | यह देखकर चमत्कृत हो गई की वह आदिशक्ति श्री महामाया देवी की सभा लगी हुई है | इसे देखकर वे अपनी चेतना खो बैठे |सुबह होने पर वे अपनी राजधानी तुम्मान खोल लौट गये और रतनपुर को अपनी राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया तथा 1050 ई. में श्री महामाया देवी का भव्य मंदिर निर्मित कराया गया | मंदिर के भीतर महाकाली,महासरस्वती और महालक्ष्मी स्वरुप देवी की प्रतिमाए विराजमान है| मान्यता है कि इस मंदिर में यंत्र-मंत्र का केंद्र रहा होगा | रतनपुर में देवी सती का दाहिना स्कंद गिरा था | भगवन शिव ने स्वयं आविर्भूत होकर उसे कौमारी शक्ति पीठ का नाम दिया था | जिसके कारण माँ  के दर्शन से कुंवारी कन्याओ को सौभाग्य की प्राप्ति होती है | नवरात्री पर्व पर यहाँ की छटा दर्शनीय होती है | इस अवसर पर श्रद्धालूओं द्वारा यहाँ हजारो की संख्या में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित किये जाते है |
कैसे पहुंचें:
बाय एयर

रायपुर (141 कि.मी.) निकटतम हवाई अडडा है जो मुंबई, दिल्ली , कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरू, विशाखापट्नम, चेन्नाई एवं नागपुर से वायु मार्ग से जुड़ा हुआ है।

ट्रेन द्वारा

हावड़ा-मुंबई मुख्य मार्ग रेलमार्ग पर बिलासपुर (25 कि.मी.) समीपस्थह रेल्वेा जंक्शहन है।

सड़क के द्वारा

:- बिलासपुर से रतनपुर के लिये हर एक घंटे में बस तथा टैक्सी इत्याुदि वाहन सुविधा है।
इतिहास
ऐतिहासिक रूप से, बिलासपुर को रतनपुर के कल्चुरि राजवंश द्वारा नियंत्रित किया गया था। हालांकि, बिलासपुर शहर, मराठा साम्राज्य के शासनकाल में वर्ष 1741 के आसपास प्रमुखता से आया। बिलासपुर शहर लगभग 400 वर्ष पुराना है और “बिलासपुर” का नाम “बिलासा” नामक फिशर-महिला के नाम पर पड़ा है।
बिलासपुर जिला वर्ष 1861 में गठित किया गया और इसके बाद वर्ष 1867 में बिलासपुर नगर पालिका का गठन किया गया। बिलासपुर जिला न केवल छत्तीसगढ़ राज्य में प्रसिद्ध है बल्कि चावल की गुणवत्ता, कोसा उद्योग और इसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि जैसी अनूठी विशेषताओं के कारण भारत में प्रसिद्ध है। पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए बिलासपुर जिले को “धान का कटोरा”  के नाम से जाना जाता है।
रतनपुर छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले की एक नगर पालिका है। विशेष*-अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत तत्कालीन बिलासपुर जिले में रतनपुर से ही हुई थी पण्डित कपिल नाथ द्विवेदी एव वैष्णव बाबाजी के नेतृत्व में वन्देमातरम, भारत माता के जयघोष के साथ प्रभातफेरी निकालने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था ।

Khutaghat (Ratanpur)

KHUTAGHAT DAM (Ratanpur, Chhattisgarh, India) :-
“Khutaghat Dam” is One of the Famous tourist Place. It is located at a distance of 12 km from the city famous for the Ratanpur ruins. The Khutaghat Dam has built a dam on the calm bank of the Kharang River and helps in the irrigation process of the entire area.
If you visit Khutaghat Dam, you will be enchanted by its impeccable beauty. And the surrounding forests and hills are an added attraction boost for this dam. And it is a beautiful picnic spot where thousands of tourists come every year to see this beautiful scene. A story called Khuntaghat when the dam was not cut down the forest of drowning. Then there was no cost of forest or wood. Later in the water, its stub or what was called a peg, remained in the water. They used to hit the fishing boat. Later on it was called Khuntaghat. The last tree among them was that of tendu. When the dam dried, people would cut it, so strong that the ax would blow. It had a beautiful strong stick. The rich people of the surrounding villages are still kept in this black stick with a silver or brass ring. 
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You can easily reach Khutaghat via Bilaspur-Ambikapur highway.
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खुटाघाट बांध बिलासपुर | Khutaghat Dam Ratanpur Bilaspur
दोस्तों बरसात के दिनों में अगर आप पिकनिक, पर्यटन स्थल ढूंढ रहे हैं, जिससे आपके मन में फ्रेश और शांति महसूस हो, तो आपको खुटाघाट जलाशय एक बार जरूर घूमकर आ जाना चाहिए। Khutaghat Dam में आपको traking, Site Seen, भरपूर देखने को मिलेगा। प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में पर्यटक यहाँ घूमने को पहुंचते हैं।
खुटाघाट जलाशय का इतिहास और लोकवानी | History of Ghutaghat Dam And Folklore
खुटाघाट बांध को संजय गांधी जलाशय के नाम से बनाया गया हैं। जो सन 1930 में बनकर तैयार हुआ हैं। इनकी लागत लगभग 6563097रु के आसपास बताई जाती हैं।
संजय गाँधी जलाशय को खुटाघाट बांध कहा जाता हैं। कहा जाता हैं की इस बांध को बनाने के लिए लगभग 208 गावों को मिलाने से बना हुआ है, दोस्तों आप इसी से अनुमान लगा सकते है की यह बांध कितना बड़ा होगा।
इस बांध को बनाते समय यहां जंगल हुआ करता था, जिसमे बहुत सारे पेड़-पौधे हुआ करते थे। बाँध के निर्माण के समय पेड़ो को काटा नहीं गया, जिससे वह पेड़ पानी के अंदर ही रह गया। पानी के अंदर रहने की वजह से वह पेड़ ठूठ में परिवर्तन हो गया, जो इतना मजबूत हो गया की कुल्हाड़ी से काटने पर उल्टा चोट पहुंचाते थे।
जिसे छत्तीसगढ़ की स्थानीय भाषा में “खूंटा” कहते हैं, इसी से संजय गांधी जलाशय का नाम खूंटाघाट बांध पड़ा।
आसपास के लोग आज भी इस बाँध के अंदर पायी जानी वाली लकड़ी को काटकर लाठी बनाकर, यादकार के तौर पर रखा हुआ है।
खूटाघाट बांध कब जाये, कैसे जाये
आप खुटाघाट बांध कभी भी जा सकते हैं, लेकिन आपको Adventure पसंद हैं तो आप बरसात के समय में जाना चाहिए। बांध का overflow water देखने का आनंद ही कुछ और हैं। बांध में नहाना सख्त मना हैं, कहा जाता हैं, इस बांध में बहुत सारे मगरमच्छ हैं। लेकिन जब हम लोग गए थे तो देखने को नहीं मिला।
खुटाघाट जलाशय बिलासपुर जिला में स्थित हैं। जो बिलासपुर से 32Km तथा रतनपुर से मात्र 7Km की दुरी में स्थित हैं। जो बिलासपुर-अंबिकापुर हाइवे से होते हुए आप पहुंच सकते हैं।
खुटाघाट में रुकने की व्यवस्था और Site Seen | Khutaghat accommodation And Site seen
Khutaghat Dem में वैसे तो आप कुछ घंटे Visit कर वापस जा सकते है, फिर भी आप बाहर से आये है, और रुकने का प्लान हैं तो छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा Toutist Rest House का निर्माण बांध के ऊपर में कराई हुई है। booking के लिए https://www.chhattisgarhtourism.in पर जा सकते हैं।
 
खुटाघाट डेम को जब आप सबसे पहला बार सीढ़ियों से जड़कर ऊपर जाते हुए, बांध को देखोगे तो मैं गारंटी लेता हूँ, आपके दिलों-दिमाग में शांति, आनंद के सिवा और कुछ दिखाई नहीं देगा।आप वहां के Site seen को देखकर मंत्र मुग्ध हो जायेंगे। बरसात के समय बांध से ऊपर जाते हुए Overflow Water, आपको झरने सा प्रतीत होगा। जिसमे आपका मन तैरने को ललायित होगा।
अगर आप traking के शौक़ीन है तो तो वहां के छोटे से पहाड़ में खड़ी चढाई करके ऊपर जा सकते है। जहाँ से आपको बिल्कुल इक नया अनुभव होगा। जिसे आप अपने Instagram, Facebook और Whatsapp के स्टेट्स में लगाए बिना नहीं रह सकते है।
इस बांध के बीच में एक भगवन शिव का मंदिर हैं, जो गर्मी के समय में ही पहुंच सकते हैं, बाकी समय यह मंदिर पानी में डूबा रहता हैं। सुबह 9बजे से शाम के 4बजे तक वहां बोटिंग भी कराई जाती हैं। जिसमे जाकर आप आनंद का अनुभव ले सकते हैं।
दोस्तों रतनपुर महामाया मंदिर के लिए प्लान बनाते हो तो साथ ही खुटाघाट बांध को भी विजिट करके देख लीजिये। यहां आपको बहुत सुन्दर-सुन्दर नज़ारे देखने को मिल सकता हैं।
 

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